प्रसवपूर्व और नवजात के स्‍वास्‍थ्‍य की देखभाल

प्रसवपूर्व स्‍वास्‍थ्‍य की देखभाल

प्रसव पूर्व जांच के द्वारा आपके बच्‍चे के स्‍वास्‍थ्‍य के संबंध में महत्‍वपूर्ण जानकारी प्राप्‍त हो सकती है। अधिकांश गर्भावस्‍थाओं में खून की जांच और सामान्‍य स्थितियों की छानबीन के लिए इमेजिंग अध्‍ययन एक नेमी कार्य है। साधारण स्‍क्रीन टेस्‍ट और अल्‍ट्रासाउन्‍ड जांच से मां अथवा अजन्‍में बच्‍चे के लिए किसी प्रकार का खतरा नहीं होता है।

मातृ स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रम  अनिवार्य प्रासिविकी देखभाल और आर सी एच कार्यक्रम का उद्देश्‍य प्रसव पूर्व न्‍यूनतम तीन चेक अप उपलब्‍ध कराना है। इसके दौरान वज़न व रक्‍तचाप की जांच, उदर की जांच, टेटनस से प्रतिरक्षण, गर्भवती महिलाओं को आयरन और फोलिक एसिड प्रोफाइलैक्सिस के साथ-साथ एनीमिया प्रबंधन उपलब्‍ध कराया जाता है। आर सी एच कार्यक्रम के अन्‍तर्गत आपातकालीन प्रासिविकी (आब्स्‍टेट्रिक्‍स) प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र पर 24 घन्‍टे प्रसव सेवाएं तथा सुरक्षित गर्भपात सेवाएं भी उपलब्‍ध कराई जाती हैं।

प्रसवपूर्व नैदानिक जांच गर्भ संबंधी (भ्रूण) अल्‍ट्रासाउन्‍ड, एमिनियो सेन्‍टेसिस और क्रानिक विलस सैम्‍पलिंग द्वारा की जा सकती है।

तथापि देश के कुछ भागों में चिन्‍ता का एक महत्‍वपूर्ण मुद्दा है कन्‍या भ्रूण हत्‍या। राष्‍ट्रीय ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य मिशन, के अन्‍तर्गत सरकार का "लड़कियों की रक्षा करें" नामक एक कार्यक्रम है, जिसकी एक निगरानी समिति, कई प्रकाशन और एक ऑनलाइन शिकायत कक्ष है जिसमें प्रसवपूर्व निदान सुविधाओं के दुरुपयोग के विरुद्ध शिकायतें की जा सकती हैं।

अब प्रसवपूर्व तकनीक, प्रसवपूर्व निदान तकनीक (नियमन और दुरूपयोग रोकथाम) अधिनियम , से शासित होती हैं, जिसके अन्‍तर्गत भ्रूण के लिंग की पहचान और इसका प्रकटीकरण प्रतिबंधित किया गया है।

गर्भावस्‍था के दौरान देखभाल

यह अवधि बहुत महत्‍वपूर्ण है और भ्रूण की प्रारंभिक अवस्‍था से लेकर जन्‍म की अन्तिम अवस्‍था तक, अजन्‍मे बच्‍चे के विकास को निर्धारित करती है। भोजन, व्‍यायाम और प्रसवपूर्व जांच पड़ताल अति महत्‍वपूर्ण हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि माँ और बच्‍चे दोनों का स्‍वास्‍थ्‍य अच्‍छा है, इस अवधि के दौरान आवश्‍यक प्रतिरक्षण और प्रसव पूर्व जांच की जाती हैं।

गर्भावस्‍था और बच्‍चे की देखभाल में सन्निहित मुद्दों से निपटने के लिए सरकार की एक जननी सुरक्षा योजना (278 KB) (जेएसवाई) है। यह एक केन्‍द्रीय प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्‍य मातृवंश और नवजात शिशुओं की मृत्‍युदर में कमी लाना और गरीबी रेखा से नीचे (बी पी एल) परिवारों के प्रसव, संस्‍थानो (अस्‍पतालों) में करवाने की संख्‍या में वृद्धि करना है। जे एस वाई जो कि राष्‍ट्रीय ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य मिशन, की समग्र देखभाल के अंतर्गत आती है, द्वारा 19 वर्ष से अधिक आयु व जीवित 2 बच्‍चों के जन्‍म तक, गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों की गर्भवती महिलाओं को इस योजना के अन्‍तर्गत आवरण प्रदान किया जाता है।

जे एस वाई, जो कि 2003 में शुरु की गई थी, विद्यमान राष्‍ट्रीय प्रसूति लाभ योजना (16 KB) अथवा एन एम बी एस को किंचित परिवर्तित करती है। जबकि एन एम बी एस का संबंध गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों की गर्भवती महिला के लिए अच्‍छी खुराक के प्रावधान से था, वर्तमान जे एस वाई में फील्‍ड स्‍तर के स्‍वास्‍थ्‍य कर्मी द्वारा समन्वित देखभाल की प्रक्रिया स्‍थापित करके गर्भावस्‍था की अवधि के दौरान प्रसूति पूर्व देखभाल के लिए नकद सहायता, प्रसव के दौरान संस्‍थागत देखभाल और किसी स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र पर प्रसव के तुरन्‍त बाद की देखभाल को एकीकृत करती है।

नवजात के स्‍वास्‍थ्‍य की देखभाल

शिशुओं की मृत्‍युदर की रोकथाम के लिए और नई माताओं के लिए अच्‍छा स्‍वास्‍थ्‍य सुनिश्च्ति करने के लिए नवजात के स्‍वास्‍थ्‍य की देखभाल बहुत महत्‍वपूर्ण हो जाती है। इस उद्देश्‍य के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता सविधान  में और दसवीं पंचवर्षीय योजना हैं), के साथ-साथ बच्‍चों के अधिकारों के संबंध में समझौते की पुष्टि में दिखलाई देती है। इस प्रतिबद्धता को कार्रवाई में परिवर्तित करके यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि प्रत्‍येक बच्‍चा अपनी पूर्ण क्षमता तक पहुंचता है। यूनीसेफ  द्वारा, सरकार के प्रजनक और शिशु स्‍वास्‍थ्‍य II(आर सी एच II) और राष्‍ट्रीय ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रम (एनआरएचएम) नए शिशु स्‍वास्‍थ्‍य प्रस्‍ताव, जो नवजात और बाल्‍यवस्‍था बीमारी के एकीकृत प्रबंधन (आईएमएनसीआई) के रुप में जाना जाता है, के लिए अपना पूर्ण समर्थन प्रदान किया गया है।